महिलाओं के पीरियड्स के दौरान निकलने वाले ब्लड को अक्सर सिर्फ एक नॉर्मल फिजिकल प्रक्रिया मानी जाती है. लेकिन अब वैज्ञानिक इसे हेल्थ से जुड़ी कई अहम जानकारी का सोर्स मान रहे हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार पीरियड्स के दौरान निकलने वाला ब्लड गर्भाशय यानी यूटरस की स्थिति के बारे में कई महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है. यही वजह है कि हाल के वर्षों में इस पर रिसर्च तेज हो गई है और वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे किन-किन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीरियड्स के दौरान निकलने वाला ब्लड गर्भाशय से जुड़ी कई समस्याओं को समझने में मदद कर सकता है. उनके अनुसार यह एक ऐसा जैविक नमूना है जो यूटरस की सेहत के बारे में जानकारी देने में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. क्योंकि आमतौर पर गर्भाशय की स्थिति का पूरा आकलन करना आसान नहीं होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि पीरियड्स में आने वाले ब्लड से कौन सी बीमारियां पता चलती है और कैसे इसकी जानकारी मिलती है.
ये भी पढ़ें-Causes Of Body Pain: बिना मेहनत किए भी सुबह उठते ही होता है बदन दर्द? ये हैं इसके छिपे हुए कारण
एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी का मिल सकता है सुराग
वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि पीरियड ब्लड की मदद से एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी की पहचान की जा सकती है या नहीं. यह एक ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें गर्भाशय की परत जैसी कोशिकाएं शरीर के दूसरे हिस्सों में बढ़ने लगती है. जिससे दर्द और प्रजनन संबंधी समस्या हो सकती है. रिसर्च में यह सामने आया है कि जिन महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस होता है, उनके पीरियड ब्लड में कुछ खास तरह की कोशिकाएं और जीन अभिव्यक्ति अलग दिखाई देती है. उदाहरण के तौर पर उनके गर्भाशय में मौजूद नेचुरल किलर नाम की इम्यून कोशिकाओं की संख्या कम पाई गई. यह कोशिकाएं गर्भधारण की प्रक्रिया में जरूरी भूमिका निभाती है और संक्रमण से भी शरीर की रक्षा करती है.
गर्भाशय से जुड़ी दूसरी समस्याओं की भी मिल सकती है जानकारी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीरियड ब्लड केवल एंडोमेट्रियोसिस ही नहीं बल्कि कई अन्य बीमारियों का भी संकेत दे सकता है. इनमें गर्भाशय की परत का सूजन, गर्भाशय की दीवार में परत का बढ़ना और गर्भाशय से जुड़ा कैंसर जैसे Endometrial Cancer शामिल हो सकते हैं. रिसर्च में यह भी देखा गया है कि पीरियड ब्लड में मौजूद कुछ कोशिकाओं में सूजन से जुड़ें संकेत ज्यादा पाए जाते हैं जो गर्भाशय की परत को नॉर्मल तरीके से ठीक होने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. इस तरह की स्थिति का संबंध कुछ दूसरी समस्याओं जैसे Polycystic Ovary Syndrome या बार-बार गर्भपात से भी जोड़ा गया है.
बायोमार्कर की तलाश में जुटे वैज्ञानिक
वैज्ञानिक पीरियड ब्लड में मौजूद खास प्रोटीन, जीन और कोशिकाओं की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें बायोमार्कर कहा जाता है. यह बायोमार्क स्पष्ट रूप से पहचाना जा सके तो फ्यूचर में बिना सर्जरी के ही बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इस दिशा में काम करते हुए कुछ रिसर्चर ने हजारों महिलाओं के नमूनों का रिसर्च किया, उनका मानना है कि पीरियड ब्लड का विश्लेषण भविष्य में एक आसान और कम दर्दनाक जांच का तरीका बन सकता है.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator
